Saturday, February 14, 2026
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समुद्र मंथन:…,

!! 🚩श्रुतम्-1572🚩 !!

युगाब्द ५१२६ वि.सं २०८१ फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी बुधवार 26 फरवरी 2025 (महाशिवरात्री) आज का दिन आप सभी के लिए सुखमय मंगलमय हो…!🕉

भारत की महान् सांस्कृतिक परंपराएं एवं विरासत – 32

समुद्र मंथन:

कहानी का प्रारंभ देवताओं (देवों) और राक्षसों (असुरों) के अमृत, अमरता के अमृत को प्राप्त करने की खोज में एकजुट होने से होता है, इस अमृत में अनंत जीवन और अजेयता प्रदान करने की शक्ति थी, इस अमृत को प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों को एक पहाड़ को मथनी की छड़ और नाग वासुकी को रस्सी के रूप में उपयोग करके दूध के सागर (क्षीर सागर) का मंथन करना पड़ा…!

माउंट मंदार एक विशाल पर्वत को मथनी के रूप में प्रयोग किया गया था, वासुकी सर्प पर्वत के चारों ओर लिपटा हुआ था और देवता और असुर समुद्र मंथन करने के लिए उसके सिरों को खींच रहे थे…!

समुद्र जो युगों से शांत था, कांपने लगा क्योंकि सृजन (देवता) और विनाश (राक्षस) की शक्तियों ने मिलकर अमृत निकालने का काम किया, यद्यपि यह प्रक्रिया सरल नहीं थी, जैसे-जैसे मंथन जारी रहा, समुद्र से अनेक बहुमूल्य और शक्तिशाली चीजें निकलीं, जिनमें दिव्य प्राणी, रत्न, विष (हलाहल) और अंत में अमृत (अमरता का अमृत) शामिल थे…!

👏🪷🚩🌹🙏🌹🚩🪷👏

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