spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_imgspot_imgspot_img

Related Posts

पाँच “स” जीवन की सच्ची पहचान…,

समाज, संयम, संजीदगी, सेवा और सम्मान।
इन पाँचों “स” के बिना जीवन जैसे श्मशान।।

इंसान अकेला पैदा होता है, लेकिन उसका जीवन अकेले नहीं चलता, उसे परिवार चाहिए, समाज चाहिए, रिश्ते चाहिए और सबसे बढ़कर ऐसे संस्कार चाहिए, जो उसे इंसान से इंसानियत तक ले जाएँ…!

आज हमारे पास साधन बढ़ गए हैं, लेकिन संवेदनाएँ घटती जा रही हैं, रिश्ते मोबाइल की स्क्रीन पर सिमट रहे हैं, सम्मान दिखावे में बदल रहा है और सेवा भी कई बार प्रचार का माध्यम बन गई है, ऐसे समय में जीवन को सही दिशा देने वाले पाँच “स” को समझना बेहद जरूरी है…!

  1. समाज: जहाँ ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ होता है…,

समाज केवल लोगों की भीड़ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुःख में खड़े होने की भावना है, जिस समाज में पड़ोसी की परेशानी अपनी परेशानी लगे, बुजुर्गों का सम्मान हो, युवाओं को दिशा मिले और कमजोर को सहारा मिले, वही समाज मजबूत होता है, समाज को बदलने की शुरुआत दूसरों से नहीं, अपने व्यवहार से करनी होगी…!

  1. संयम: सफलता का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच…,

आज मनुष्य के पास सब कुछ है, लेकिन खुद पर नियंत्रण कम होता जा रहा है, जुबान पर संयम नहीं तो रिश्ते टूटते हैं, क्रोध पर संयम नहीं तो सम्मान जाता है, इच्छाओं पर संयम नहीं तो चरित्र कमजोर होता है, संयम कमजोरी नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय पाने की शक्ति है…!

  1. संजीदगी: रिश्तों और जिम्मेदारियों की समझ…,

हर बात मजाक नहीं होती और हर परिस्थिति तमाशा नहीं होती, संजीदगी का अर्थ उदास रहना नहीं, बल्कि समय, परिस्थिति और रिश्तों की गंभीरता को समझना है, किसी के दुःख में हँसी-मजाक करने, कटाक्ष करने वाला व्यक्ति कितना भी पढ़ा-लिखा क्यों न हो, जीवन की समझ में गरीब ही है…!

  1. सेवा: मानवता का सबसे सुंदर रूप…,

सेवा का अर्थ केवल धन देना नहीं है, किसी भूखे को भोजन देना सेवा है, किसी बुजुर्ग को समय देना सेवा है, किसी निराश व्यक्ति को हौसला देना सेवा है, किसी जरूरतमंद की मदद करके उसका सम्मान बचाना भी सेवा है, जिस सेवा की तस्वीर खिंचवानी पड़े, वह प्रचार हो सकती है, लेकिन जो सेवा बिना बताए की जाए, वही सच्ची मानवता है…!

  1. सम्मान: इंसान की असली पूँजी…,

धन कमाना आसान हो सकता है, लेकिन सम्मान कमाना वर्षों की साधना है, पद, पैसा और प्रतिष्ठा कभी भी स्थायी नहीं होते, आज कुर्सी आपके पास है, कल किसी और के पास होगी, आज लोग आपके आगे-पीछे हैं, कल रास्ते बदल सकते हैं, लेकिन आपके व्यवहार से मिला सम्मान लंबे समय तक जीवित रहता है, छोटे को छोटा समझकर अपमानित मत करो, क्योंकि समय किसी को भी बड़ा और छोटे को बड़ा बना सकता है…!

आज समाज को पाँच “स” की जरूरत है, हमें ऐसे “समाज” की जरूरत है जहाँ समाज में अपनापन हो, “संयम” में शक्ति हो, “संजीदगी” में समझ हो,
“सेवा” में निस्वार्थ भाव हो और “सम्मान” में समानता हो…!

क्योंकि केवल पैसा, पद और प्रसिद्धि से जीवन सफल नहीं होता, जीवन तब सार्थक होता है, जब हमारे कारण किसी का जीवन थोड़ा आसान हो जाए, किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाए और हमारे जाने के बाद भी लोग हमारे व्यवहार को याद करें…!

इसलिए याद रखिए: “पाँच ‘स’ को जीवन का संस्कार बना लो, वरना साधनों-संसाधनों से भरा जीवन भी भीतर से श्मशान बन सकता है…!”

समाज बदलेगा तो शुरुआत हमसे होगी, और हम बदलेंगे तो आने वाली पीढ़ी बदलेगी…!

यही सच्चा सामाजिक जनजागरण है…!

सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®
सत्य का “दर्पण”-समाज को “अर्पण”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles