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जिनके घर शीशे के होते हैं बाबू वो दूसरों के घर पर पत्थर नही फैंकते,

जो स्वयं हार के बाद मुँह छिपाते फिरते हैं वो औरों पर कटाक्ष नही करते…!

हम किसी को छेड़ते नही हैं, जो हमें छेड़ता हैं उसे उसकी हैसियत बताने से भी पीछे नही हटते…!

यह बात बिल्कुल सटीक है और जीवन के कड़वे अनुभवों में से एक है, अक्सर कहा जाता है कि आप किसी को ज्ञान दे सकते हैं, लेकिन समझ नहीं, क्यूँकि मूर्खता दरअसल कुछ लोगों के लिए एक चुनाव (choice) बन जाती है, ऐसे व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखने के बजाय उन्हें बार-बार दोहराने को ही अपनी पहचान बना लेता है…!

​इस स्थिति को कुछ प्रभावी तरीकों से समझा जा सकता है:

​1. तर्क की सीमा (The Limit of Logic): ​मूर्ख व्यक्ति के पास तर्क (logic) की कमी नहीं होती, बल्कि उसका अपना एक अलग ही तर्क होता है, जो अक्सर वास्तविकता से कोसों दूर होता है, आप उसे जितना समझाएंगे, वह अपनी बात को सही साबित करने के लिए उतनी ही नई कहानियाँ गढ़ेगा…!

​2. नजरअंदाज करने का प्रभाव
​आपने सही कहा कि उन्हें नजरअंदाज करना भी कभी-कभी काम नहीं आता, ऐसे लोग अक्सर “Attention Seekers” होते हैं, जब आप उन्हें नजरअंदाज करते हैं, तो वे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए और भी बड़ी मूर्खता करते हैं, ताकि किसी भी तरह आपकी प्रतिक्रिया (reaction) हासिल कर सकें…!

​3. स्वभाव की जड़ता: ​जैसे किसी पत्थर को कितना भी पानी में रखें, वह अंदर से वैसा ही रहता है, वैसे ही कुछ लोगों का स्वभाव बदलने के बजाय समय के साथ और भी कट्टर हो जाता है, कबीर दास जी ने भी इसी संदर्भ में कहा है:
​”मूर्ख को समझावते, ज्ञान गाँठि का जाय।”
(अर्थात: मूर्ख को समझाने में अपना ही ज्ञान और समय व्यर्थ होता है।)

एक छोटा सा सुझाव: ​जब आप जानते हैं कि सामने वाले का स्वभाव नहीं बदलेगा, तो सबसे बेहतर रणनीति “Emotional Detachment” (भावनात्मक दूरी) है, ​उनकी बातों को व्यक्तिगत रूप से न लें, ​अपनी ऊर्जा उन्हें सुधारने के बजाय अपनी शांति बनाए रखने में लगाएं…!

​यह स्वीकार कर लें कि दुनियाँ में हर किसी को ‘शिक्षित’ किया जा सकता है, लेकिन हर किसी को ‘दीक्षित’ (समझदार) नहीं बनाया जा सकता हैं…!

🚂 इंजन करता रह गया प्लेटफॉर्म का इंतज़ार !
19 वोट भी मुश्किल से मिले गया बुरी तरह हार ।।
गया बुरी तरह हार, मुँह छुपाया कुछ न किया ।
खुदकुशी की धमकी दे, अपना नाम वापिस लिया ।।

🚂 “इंजन तो जोरदार था, बस जनता ने प्लेटफॉर्म ही बदल दिया, अब पाँच साल बाद अगली ट्रेन का इंतज़ार करिए…!”

🚂 ​बिना डिब्बों की गाड़ी: “इंजन तो स्टार्ट हुआ, पर पीछे जनता के समर्थन के डिब्बे ही नहीं जुड़े, जो धोखेबाज और समाज को तोड़ने वाले जुड़े, समाज ने उनको दुत्कार दिया, अब बेचारा अकेले इंजन कहाँ तक जाता…?”

​सिग्नल की समस्या: “ड्राइवर तैयार था, इंजन में कोयला भी पूरा था, लेकिन जनता ने रेड सिग्नल दिखाकर ” डंपिंग यार्ड” में भेज दिया…!”

​पटरी से उतरी: “इंजन की रफ्तार तो बहुत थी, लेकिन राजनीति की ढलान पर ब्रेक फेल हो गए और 🚂 पटरी से उतर गया…!” ​😂

​चेन पुलिंग: “लगता है वोटर्स ने वोट डालने के बजाय बीच रास्ते में ही 🚂 कि चेन पुलिंग’ कर दी थी…!”

​लोकल ट्रेन का हाल: 🚂 “इंजन का हाल भी मुंबई लोकल जैसा हो गया, भीड़ बहुत थी पर सीट (जीत) मामा जी को मिल गई…!”

​टिकट कैंसिल: “जनता ने वोट का कन्फर्म टिकट देने के बजाय “वेटिंग लिस्ट” में डाल दिया और अंत में चार्ट (रिजल्ट) निकलते ही ऑनलाइन का टिकट कैंसिल कर दिया…!”

🚂 ​इंजन गरम, रास्ता नरम: “इंजन की आवाज (भाषण) तो बहुत तेज थी, पर जनता ने शोर सुनकर कान बंद कर लिए और रास्ता बदल लिया…!”

​स्टेशन छूट गया: “साहब 🚂 इंजन बढ़ाते रह गए और जीत का स्टेशन पीछे ही छूट गया…!”

​📝🚂 ​”इंजन की सीटी तो बजी, पर समाज हरी झंडी दिखाना भूल गई…!”

​”सामाजिक ट्रैक पर इस बार इंजन ‘शंटिंग’ में चला गया…!”

​”बिना डिब्बों का 🚂 इंजन सिर्फ शोर मचाता है, मंज़िल तक नहीं पहुँचता…!”

👉 सुरेश कुमार व्यास “जानम”✍️
👉 सिखवाल समाचार ®️

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