SAMPADKIY/संपादकीय: “कल कर लेंगे” वाले समाज सेवियों कि समाज सेवा…,
“आज का काम कल की चोरी है, जो बंदा आज का काम कल पर टालता है, वो शायद अपने सुनहरे भविष्य को चुरा रहा होता है…!”
समाज सेवा की दुनिया में एक बड़ा ही लोकप्रिय वाक्य है: “कल कर लेंगे…!”
बैठक आज रखी जाए तो जवाब: “कल देखेंगे…!”
समाज के किसी जरूरतमंद की मदद की बात हो तो: “कल कर देंगे…!”
किसी व्यवस्था में सुधार की बात उठे तो: “अभी समय नहीं है, बाद में करेंगे…!”
और जब वही “बाद में” महीनों तक नहीं आता, तो समाज पूछता रह जाता है: “वो कल आखिर आया कब…?”
विडंबना यह है कि कुछ स्वयंभू समाजसेवियों के लिए समाज सेवा कोई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि फुर्सत मिलने पर किया जाने वाला शौक बन गई है, जब फोटो खिंचवाने का अवसर हो तो तत्काल सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन जब वास्तविक जिम्मेदारी निभाने का समय आता है तो उनका सबसे भरोसेमंद साथी होता है: “कल कर लेंगे…!”
ऐसे समाजसेवी हर काम के लिए भविष्य की तारीख सुरक्षित रखते हैं, समस्या आज की हो तो समाधान कल का, बैठक आज की हो तो उपस्थिति कल की, हिसाब आज माँगा जाए तो जवाब कल का, और जवाबदेही आज चाहिए तो साहब कहते हैं: “अभी बहुत समय पड़ा है…!”
लेकिन समाज सेवा में “कल” का इंतजार कई बार किसी जरूरतमंद के लिए बहुत महँगा साबित होता है, जिस छात्र को आज सहायता चाहिए, उसके लिए कल देर हो सकती है, जिस परिवार को आज सहयोग चाहिए, उसके लिए कल उम्मीद टूट सकती है, जिस संस्था को आज निर्णय चाहिए, उसके लिए कल तक विवाद बढ़ सकता है…!
समाज सेवा में समय पर किया गया छोटा काम भी बड़ा होता है, जबकि देर से किया गया बड़ा काम भी कई बार अपना अर्थ खो देता है…!
कुछ लोग काम इसलिए टालते हैं क्योंकि उन्हें जिम्मेदारी से डर लगता है, कुछ इसलिए क्योंकि उन्हें निर्णय लेना नहीं आता, और कुछ इसलिए क्योंकि वे चाहते हैं कि काम कोई और कर दे और श्रेय मिलने पर वे सबसे आगे खड़े हो जाएँ…!
ऐसे लोगों से बस इतना कहना है:
समाज सेवा में कैलेंडर नहीं, कर्म देखा जाता है…!
“कल करेंगे” कहने से कोई समाजसेवी नहीं बनता, आज किसी के काम आ जाने से समाज सेवा सिद्ध होती है…!
याद रखिए, समय किसी समिति की बैठक का एजेंडा नहीं है कि उसे स्थगित करके अगली तारीख दे दी जाए,
आज का अवसर यदि कल पर टाल दिया, तो हो सकता है कल अवसर ही न मिले…!
इसलिए समाज के उन तमाम “कल कर लेंगे” वाले सेवाभावी महोदयों से विनम्र व्यंग्य सहित निवेदन है:
कल की चिंता छोड़िए, आज की जिम्मेदारी निभाइए, फोटो बाद में खिंचवा लीजिए, पहले किसी के चेहरे पर मुस्कान लाइए…!
क्योंकि इतिहास यह नहीं पूछेगा कि आपने कितनी बार कहा था “मैं कर दूँगा…!”
इतिहास यह पूछेगा कि जब समाज को आपकी जरूरत थी, तब आपने वास्तव में किया क्या था…?
संपादकीय टिप्पणी:
“समय पर किया गया कर्म ही सेवा है, वरना “कल कर लेंगे” तो बहाना भी हो सकता है और जिम्मेदारी से बचने का सबसे सभ्य तरीका भी…!”
सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®
सत्य का “दर्पण” समाज को “अर्पण”






