SAMPADKIY/DILKHUSH VYAS: सेवा, समर्पण और स्वाभिमान: जब “मेगा सिटी” में एक देश के सैनिक को मिला “सिखवाल ब्राह्मण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट” अहमदाबाद का सहारा
15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और देश की आज़ादी के उत्सव का दिन होता है। यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि सीमाओं पर तैनात हमारे वीर सैनिक दिन-रात जागकर हमारी रक्षा करते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जब वही सैनिक अपने परिवार और बीमार बच्चे के लिए किसी अपरिचित शहर में मदद ढूंढता है, तो एक समाज के रूप में हमारी क्या ज़िम्मेदारी बनती है…?
आज स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर पर, हम आपके साथ एक ऐसी सच्ची और दिल को छू लेने वाली घटना साझा कर रहे हैं, जो यह साबित करती है कि निःस्वार्थ समाज-सेवा ही सच्ची देश-सेवा है…,
जब ‘मेगा सिटी’ की भीड़ में राह भटक गई…
यह बात पिछले साल की है, गुजरात की प्रसिद्ध मेगा सिटी अहमदाबाद जो देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों, विश्वस्तरीय मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों और उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाओं के लिए जानी जाती है, वहां हर रोज़ देश के कोने-कोने से हज़ारों लोग इलाज के लिए आते हैं, उस समय अहमदाबाद शहर में आईपीएल (IPL) के मैचों का रोमांच भी चरम पर था, पूरे देश से पर्यटकों और क्रिकेट प्रेमियों का हुजूम उमड़ा हुआ था, जिसकी वजह से शहर के लगभग सभी होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस पूरी तरह से आरक्षित थे, इसी आपाधापी के बीच हमारे सिखवाल समाज के ही एक वीर सैनिक (जो भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं) अपनी पत्नी और बीमार छोटी बच्ची के इलाज हेतु अहमदाबाद पहुंचे…!
वे साहिबाग (शाहीबाग/रेलवे स्टेशन क्षेत्र) उतरे और सबसे पहले बच्ची को लेकर सिविल अस्पताल गए, अस्पताल में बच्ची का शुरुआती इलाज और चेकअप तो हो गया, लेकिन लंबी यात्रा की थकान, कड़कती धूप और बच्ची की तबियत को देखते हुए परिवार को कुछ घंटों के विश्राम, नहाने-धोने और फ्रेश होने के लिए एक कमरे की सख्त जरूरत थी, इसके बाद शुरू हुई उस सैनिक की असली परीक्षा। उसने पूरे इलाके में एक-एक होटल और लॉज के चक्कर काटे, स्थिति यह थी कि होटल वाले दोगुने-तिगुने दाम (Double-Triple Rates) मांगने पर भी एक कमरा देने को तैयार नहीं थे, कड़कती धूप में बीमार बच्ची को गोद में लिए जब हर जगह से केवल “नो वैकेंसी” का जवाब मिला, तो सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाला वह जाबांज़ सैनिक भी अपने परिवार की ऐसी स्थिति देखकर भीतर से असहाय महसूस करने लगा…!
एक सवाल…? और मिल गई मंजिल…!
थक-हार कर वे सिविल अस्पताल के गेट नंबर 4 के सामने रोड किनारे स्थित एक डेयरी पर पहुंचे, सैनिक ने उम्मीद भरे स्वर में डेयरी वाले से पूछा:
“भैया, क्या आसपास कोई ऐसी होटल या जगह मिलेगी, जहां हम थोड़ा विश्राम कर सकें…? मेरी छोटी बच्ची की तबियत खराब है और कोई होटल वाला डबल पैसे देने पर भी जगह नहीं दे रहा है…!”
डेयरी वाले ने ध्यान से देखा और सहज भाव से पूछा: “आप किस समाज से हैं…?”
फौजी भाई ने कहा:”हम सिखवाल ब्राह्मण हैं…!”
यह सुनते ही डेयरी वाले के चेहरे पर मुस्कान आ गई, उसने सामने इशारा करते हुए कहा: “अरे भाई…! फिर आप दर-दर क्यों भटक रहे हैं…? वो सामने देखिए…, वो खड़ा है आपके समाज का ‘सिखवाल ब्राह्मण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट भवन’…!”
जब मिला “अपनेपन” का अहसास और निशुल्क सहयोग रूपी सेवा का आनंद…,
सैनिक अपनी पत्नी और बेटी के साथ तुरंत भवन के अंदर पहुंचे, वहां ऑफिस में जाकर जब उन्होंने जानकारी ली और अपना रजिस्ट्रेशन करवाया, तो वहां का दृश्य और व्यवस्था देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, अहमदाबाद जैसी विशाल “मेगा सिटी” में जहां लोग कमरे के लिए दोगुना-तिगुना किराया देने पर भी तरस रहे थे, वहां रहने, खाने-पीने और इलाज के लिए आने वाले समाजबंधुओं के लिए सब कुछ “पूर्णतः निःशुल्क” (Free of Cost) सेवा उपलब्ध थी, भवन की दिव्य और सेवाभावी व्यवस्था देखकर सैनिक परिवार का मन आनंद और तृप्ति से भर गया…!
अध्यक्ष महोदय को फोन और भावुक धन्यवाद
सैनिक को अपनी ड्यूटी और यात्रा के कारण जल्दी निकलना था, वे भवन में आराम से नहाए-धोए, फ्रेश हुए, बीमार बच्ची को विश्राम कराया और जाने से पहले उन्होंने चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष महोदय को फोन लगाया और फोन पर फौजी भाई ने भावुक होकर कहा:
“अध्यक्ष जी” आज इस बड़े शहर में होटल वाले डबल-ट्रिपल पैसे मांगने पर भी जगह नहीं दे रहे थे, जब मैं भटकते हुए अपने समाज के इस भवन में पहुंचा और यहां की निःशुल्क सेवा-व्यवस्था देखी, तो मेरा दिल गदगद हो गया, आपने और भामाशाह जोशी परिवार द्वारा समर्पित त्याग तथा ट्रस्ट ने समाज के लिए जो यह अलख जगाई है, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और साधुवाद…, डॉक्टर साहब ने बच्ची को पुनः चेकअप के लिए बुलाया है, इसलिए मैं दीपावली के समय बच्ची के रूटीन चेकअप हेतु वापस अहमदाबाद आऊंगा और आपसे फुर्सत में मुलाकात करूंगा…।”
दीपावली पर पुनः आगमन: जब “समाज-सेवा” बनी “देश-सेवा”
डॉक्टर के परामर्श अनुसार, दीपावली के शुभ अवसर पर सैनिक भाई अपनी बेटी का पुनः चेकअप कराने हेतु अहमदाबाद आए और अपना वादा निभाते हुए पुनः सिखवाल भवन पधारे, इस बार उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं और कहा: “IPL के समय जब मैं पहली बार आया था, तब बाहर के हालात बहुत खराब थे, लेकिन उस कठिन समय में जो सहारा मुझे इस सामाजिक सहयोग भवन से मिला, उसने मेरे दिल में समाज के प्रति सम्मान कई गुना बढ़ा दिया, आज बच्ची का चेकअप भी अच्छे से हो गया और अपने समाज भवन में आकर मन को बहुत शांति मिली…!”
चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उस वीर सैनिक और उनके परिवार का आदर-सत्कार किया, ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा: “हम आपकी तरह तो सीमाओं पर जाकर देश की रक्षा नहीं कर सकते, लेकिन आज सीमा पर तैनात अपने देश के वीर सैनिक और उनके परिवार की सेवा करने का अवसर हमें मिला, तो हमें ऐसा लगा मानो हमने खुद बॉर्डर पर जाकर देश-सेवा कर ली हो…!”
प्रचार-प्रसार: हमारा परम कर्तव्य:
अक्सर कुछ फर्जी लोग कहते हैं कि “सामाजिक मंच तथा सोशल मीडिया पर ऐसे कामों का इतना प्रचार-प्रसार क्यों करते हो…?”
लेकिन यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि प्रचार-प्रसार किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उस अंतिम व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाने के लिए होता है, जिसे वास्तव में मदद की जरूरत है, प्रचार का असली मकसद यही है कि भारत के किसी भी कोने में बैठा सिखवाल भाई यह जान सके कि “अहमदाबाद जैसी मेगा सिटी” में उसका “अपना एक घर” है और कठिन समय में समाज का यह “सिखवाल भवन” उसके साथ मजबूती से खड़ा है, यह स्वयं का प्रचार-प्रसार नहीं बल्कि जन-जागरण हैं, जिसका लाभ हर उस जरूरतमंद समाज बंधू तक पहूँचाना हैं जो इस सेवा का वास्तविक पात्र है तथा समाज के प्रत्येक उस भामाशाह तक पहूँचाना हैं जो अपने सहयोग का पूरा-पूरा धर्म लाभ प्राप्त कर सकें…!
स्वतंत्रता दिवस पर हमारा संकल्प और आह्वान:
आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर हम अहमदाबाद के सिखवाल ब्राह्मण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के सभी भामाशाहों, अध्यक्ष महोदय, पदाधिकारियों और कर्मठ सेवाधारियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए समस्त देशवासी सिखवाल समाज बंधुओं से विनम्र निवेदन करते हैं कि इस संदेश और भवन की जानकारी को अपने सभी व्हाट्सएप्प ग्रुपों, मित्रों और समाजबंधुओं तक अधिक से अधिक पहुँचाये ताकि सिखवाल समाज के प्रत्येक जरूरतमंद बंधू को समय पर मदद पहुंच सके…!
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि हम समाज के इस महान सेवा-यज्ञ में तन, मन और धन से अपना योगदान देंगे…!
“मानव सेवा ही माधव सेवा”
“हाथों में हाथ हो, अपनों का साथ हो,
सेवा और समर्पण से, हर समाजबंधु का विकास हो…!”
!! जय हिंद !! !! भारत माता की जय !!
!! जय ऋषिराज !! !! माता शांता की जय हो !!
सिखवाल ब्राह्मण समाज !! एकजुट, सेवाभावी और समर्पित !!
✍️
शर्मा दिलखुश व्यास
कमेटी मेंबर अहमदाबाद सिखवाल समाज युवा संगठन






