“ज़िंदगी को ठंड और घमंड से बचाकर रखना चाहिए,
क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में इंसान अकड़ जाता है…!”
यह बात सिर्फ मौसम की ठंड और इंसान के घमंड की नहीं है, बल्कि जीवन के उन दो दृष्टिकोणों की ओर इशारा करती है, जहाँ इंसान धीरे-धीरे अपने आसपास के लोगों और रिश्तों से दूर होने लगता है…!
ठंड शरीर को अकड़ा देती है, और घमंड इंसान के व्यवहार को, ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए अंगीठी की जरूरत होती है, लेकिन घमंड की ठंडक को दूर करने के लिए संस्कार, विनम्रता और आत्मबोध की जरूरत होती है…!
अक्सर इंसान के पास जब धन, पद, प्रतिष्ठा, सत्ता या सफलता आती है, तो उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है, जो कल तक सबके साथ बैठता था, आज उसे लोगों के बीच बैठना छोटा लगने लगता है, जिसे कभी दूसरों की मदद की जरूरत थी, वही आज मदद मांगने वालों को नजरअंदाज करने लगता है, यहीं से सफलता और घमंड के बीच की महीन रेखा मिटने लगती है…!
याद रखिए:
ऊँचा उठना गलत नहीं है, लेकिन ऊँचाई पर पहुँचकर नीचे वालों को छोटा समझना गलत है, समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता, आज जिसके पास साधन हैं, कल उसे भी सहारे की जरूरत पड़ सकती है, आज जिसके पास पद है, कल वह पद किसी और के पास होगा, आज जिसके चारों तरफ भीड़ है, कल वही भीड़ किसी और के इर्द-गिर्द हो सकती है…!
इसलिए सफलता को सिर पर नहीं, व्यवहार में उतारिए, धन को अहंकार नहीं, सहयोग का माध्यम बनाइए, पद को प्रतिष्ठा नहीं, जिम्मेदारी समझिए और रिश्तों को कमजोरी नहीं, जीवन की पूँजी मानिए…!
समाज में सबसे सुंदर या चतुर व्यक्ति वह नहीं जिसके पास सबसे अधिक धन या पद है, बल्कि वह है जिसके पास सब कुछ होने के बावजूद विनम्रता बची हुई है…!
क्योंकि:
ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े चाहिए, लेकिन घमंड से बचने के लिए अच्छे संस्कार चाहिए…!
और अंत में इतना जरूर याद रखें:
वक्त की ठंडक भी बदलती है और वक्त की गर्मी भी, इसलिए न ठंड में अकड़िए, न सफलता में, क्योंकि जिंदगी में मौसम और मुकाम दोनों बदलते देर नहीं लगाते…!
🌿 विनम्र रहिए, रिश्ते बचाइए और इंसानियत को सबसे ऊपर रखिए, यही सच्ची सफलता है, यही अच्छे और संगठित समाज की पहचान है…!
सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®
सत्य का “दर्पण”-समाज को “अर्पण”





