spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_imgspot_imgspot_img

Related Posts

जोकर बनो, मगर किसी के ताश के नहीं…,

SAMPADKIY:

“जोकर बनो तो सर्कस के बनो,
लेकिन कभी किसी ताश के न बनो…!”

सर्कस का जोकर लोगों को हँसाता है, माहौल में खुशियाँ भरता है और अपनी भूमिका निभाकर भीड़ के चेहरे पर मुस्कान लाता है, लेकिन ताश का जोकर बेचारा अपनी मर्जी से कुछ नहीं करता, जब जिस खिलाड़ी को ताश के जोकर कि जरूरत पड़ी, उसे वहीं इस्तेमाल कर लिया गया…!

आज हमारे सामाजिक जीवन में भी ऐसे बहुत से “ताश के जोकर” दिखाई देते हैं, किसी की हाँ में हाँ मिलाना, किसी के इशारे पर बोलना, किसी के विरोधी को नीचा दिखाने के लिए मोहरा बनना और बदले में पद, प्रतिष्ठा, वाहवाही या छोटी-सी कृपा की उम्मीद रखना, क्या यही सामाजिक सम्मान है…?

कुछ लोग अपने स्वाभिमान को इतनी सस्ती कीमत पर गिरवी रख देते हैं कि सामने वाला उन्हें व्यक्ति नहीं, उपयोग की वस्तु समझने लगता है, जब जरूरत हुई तो आगे कर दिया, काम निकल गया तो किनारे कर दिया, और इसे आश्चर्य कहें या दुःख कि इस्तेमाल होने वाला व्यक्ति इसे अपनी “महत्ता” समझकर खुश होता रहता है…!

व्यंग्य तो यह है कि ताश का जोकर भी खेल में अपनी कीमत जानता है, लेकिन इंसान कई बार अपनी कीमत भूल जाता है…!

समाज में रहिए, सबके साथ चलिए, सहयोग कीजिए, लेकिन अपनी बुद्धि और विवेक किसी दूसरे के पास जमा मत कराइए, किसी के व्यक्तिगत स्वार्थ, गुटबाजी या राजनीतिक चाल का मोहरा बनना सामाजिक सेवा नहीं है…!

सच्चा समाजसेवी वह नहीं जो हर ताकतवर व्यक्ति की ताल पर नाचे, बल्कि वह है जो सही बात के साथ खड़ा रहे, चाहे सामने अपना हो या पराया…!

याद रखिए:
सर्कस का जोकर बनकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाइए, लेकिन ताश का जोकर बनकर किसी और की बाजी मत जिताइए…!

क्योंकि तालियाँ कुछ क्षणों की होती हैं,
लेकिन स्वाभिमान जीवनभर की पूँजी है…!

इसलिए किसी के हाथ की कठपुतली बनने से बेहतर है कि अपने निर्णय का स्वयं मालिक बनें…!

स्वाभिमान से जियो…,
सम्मान से जियो…,
और यदि जोकर बनना ही पड़े,
तो ऐसा जोकर बनो जो दुनियाँ को हँसाए,
किसी की हार-जीत का मोहरा नहीं बने…!

संपादकीय
सुरेश कुमार व्यास “जानम”✍️
सिखवाल समाचार®
सत्य का “दर्पण”-समाज को “अर्पण”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles