जब कुछ लोगों का काम ही चुगली करना हो, तो उनकी राय की चिंता क्यों…?
प्रत्येक समाज में एक वाक्य ऐसा है जिसने न जाने कितने लोगों की जिंदगी रोक रखी हैं,
“चार लोग क्या कहेंगे…?”
अरे भाई…!
पहले यह तो पता करो कि ये चार लोग हैं कौन…?
क्या वे आपके जीवन का खर्च उठाते हैं…?
क्या वे आपकी परेशानियों में आपके साथ खड़े होते हैं…?
क्या वे आपकी असफलता का दर्द बाँटते हैं…?
क्या आपकी सफलता में सचमुच खुश होते हैं…?
नहीं…!
इनमें से कुछ तो ऐसे होते हैं, जिन्हें आपके जीवन से कोई लेना-देना नहीं होता, लेकिन आपकी जिंदगी पर टिप्पणी करने का अधिकार वे जन्मसिद्ध समझते हैं…!
आप हँसो: चुगली,
आप रोओ: चुगली,
आप सफल हो जाओ: चुगली,
आप असफल हो जाओ: चुगली,
आप चुप रहो: “अकड़ गया है…!”
आप बोलो: “बहुत बोलता है…!”
मतलब साफ है: इनका काम आप जैसी जिंदगी जीना नहीं, आपकी जिंदगी पर चर्चा करना है…!
ऐसे लोगों से एक बात सीखनी चाहिए: हर आवाज को महत्व देना जरूरी नहीं होता, इनकी बातों का जवाब देना जरूरी नहीं होता, ऐसी कुछ आवाजें सलाह नहीं होतीं, सिर्फ चुगली का शोर होती हैं…!
इसलिए जीवन में जब भी कोई कहे: “लोग क्या कहेंगे…?”
तो मुस्कुराकर पूछिए: “कौन लोग…?”
अगर जवाब में वही चार-पाँच चेहरे सामने आएँ, जो बिल्कुल फ्री हैं, हर घर की खबर रखते हैं, हर रिश्ते में दरार ढूँढते हैं, हर व्यक्ति की कमी गिनाते हैं और हर बात को मसाला लगाकर आगे बढ़ाते हैं…!
तो समझ जाइए: आपको उनकी राय नहीं, अपनी राह चुननी है…!
क्योंकि समाज में सम्मान उस व्यक्ति का नहीं होता जो हर किसी को खुश करने में अपनी जिंदगी बिता दे, सम्मान उस व्यक्ति का होता है जो सही काम करने का साहस रखता है, गलत बात के सामने खड़ा होता है और चुगली के बाजार में अपना चरित्र नीलाम नहीं होने देता…!
याद रखिए:
चार चुगलखोरों की बात से अपना रास्ता मत बदलो,
वरना जिंदगी आपकी होगी और फैसले दूसरों के…!
दुनिया बोलती रहेगी…,
आप अपना कर्म करते रहिए…!
क्योंकि:
“चुगली करने वालों का काम बोलना है, और समझदार इंसान का काम आगे बढ़ना है…!”
चार लोग क्या कहेंगे: यह सोचना छोड़िए, कल आपके कर्म देखकर वही चार लोग क्या कहेंगे, यह सोचिए…!
सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®
सत्य का “दर्पण”-समाज को “अर्पण”






