आज के दौर में प्रसिद्धि पाना जितना आसान दिखाई देता है, उतना ही खतरनाक भी हो चुका है, कुछ लोग समाज सेवा, सत्य और मेहनत के रास्ते से सम्मान कमाते हैं, वहीं कुछ लोग झूठा प्रचार, अफवाहें और दिखावे का सहारा लेकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं, ऐसे लोग थोड़े समय के लिए चर्चा में तो आ जाते हैं, लेकिन समाज में उनका वास्तविक सम्मान कभी नहीं बन पाता…!
झूठे प्रचार का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना होता है, कुछ लोग अपने छोटे-छोटे कार्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं, सोशल मीडिया पर झूठी तस्वीरें और बनावटी कहानियाँ फैलाते हैं, ताकि लोग उन्हें महान समझें, कई बार तो दूसरों के कार्यों का श्रेय भी स्वयं लेने की कोशिश करते हैं, यह केवल नैतिक पतन ही नहीं, बल्कि समाज के विश्वास के साथ धोखा भी है…!
सस्ती लोकप्रियता पाने वाले लोग अक्सर विवाद पैदा करके चर्चा में बने रहना चाहते हैं, कुछ लोगों में यह गुण खानदानी पुश्तैनी होते हैं, ऐसे लोग समाज, परिवार में भाईचारा बढ़ाने के बजाय लोगों को बांटने का कार्य करते हैं, उनकी सोच यह होती है कि यदि यह लोग विवाद करेंगे तो उनका नाम चर्चा में रहेगा, केवल चर्चा में रहने के लिये ऐसे लोग इतनी ओछी हरकतों पर भी उतर जाते हैं कि माँ-बाप, भाई-बहन, रिश्ते-नाते कुछ नही देखते, लेकिन सत्य यह है कि झूठ और दिखावे की चमक ज्यादा समय तक नहीं टिकती, समय के साथ उनका वास्तविक चेहरा समाज के सामने आ ही जाता है…!
समाज को ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है, किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके प्रचार से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक कार्यों, व्यवहार और समाज के प्रति योगदान से होना चाहिए, जो व्यक्ति बिना शोर मचाए समाजहित में कार्य करता है, वही वास्तव में सम्मान का अधिकारी होता है…!
हमें यह समझना होगा कि लोकप्रियता से अधिक महत्वपूर्ण चरित्र और सत्यनिष्ठा है, झूठे प्रचार से मिली वाहवाही क्षणिक होती है, जबकि सच्चाई और अच्छे कर्मों से मिला सम्मान जीवनभर कायम रहता है…!
सत्य का मार्ग कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन अंत में जीत हमेशा सत्य और ईमानदारी की ही होती है…!👏
सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®️
सत्य का “दर्पण” समाज को “अर्पण”






