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उधार लेकर वापस नहीं देने के लिए झगड़ा…,


आज के समय में सबसे बड़ा संकट केवल पैसों का नहीं, बल्कि विश्वास का होता जा रहा है, जब कोई व्यक्ति जरूरत के समय किसी से उधार लेता है, तब सामने वाला इंसान मानवता, अपनापन और भरोसे के कारण उसकी सहायता करता है, लेकिन दुःख तब होता है, जब वही व्यक्ति पैसे लौटाने की बात आने पर बहाने बनाने लगे, संबंध खराब करने लगे, और अंत में झगड़े पर उतर आए…!


उधार लेना गलत नहीं है, क्योंकि जीवन में कभी भी किसी को आर्थिक आवश्यकता पड़ सकती है, गलत बात तब होती है, जब व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी और ईमानदारी भूल जाता है, कुछ लोग शुरुआत में बड़ी विनम्रता से कहते हैं:
“बस कुछ दिनों की बात है, जल्दी लौटा दूँगा…!”


लेकिन समय आने पर उनका व्यवहार बदल जाता है, फोन उठाना बंद, मिलना बंद, और यदि पैसे मांग लिए जाएँ तो उल्टा नाराज़गी, कटु शब्द और झगड़ा, ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि उन्होंने केवल पैसे ही नहीं, बल्कि किसी का विश्वास भी लिया था…!


समाज में ऐसे व्यवहार से रिश्तों में दरार आती है, लोग एक-दूसरे की मदद करने से डरने लगते हैं, जहाँ भरोसा टूटता है, वहाँ अपनापन भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है, ईमानदार व्यक्ति वही है जो कठिन परिस्थिति में भी अपने वचन का सम्मान करे, यदि समय पर पैसे लौटाना संभव न हो, तो कम से कम विनम्रता और स्पष्टता बनाए रखे…!


सच्चा इंसान परिस्थिति से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से पहचाना जाता है, उधार लेकर झगड़ा करने वाले लोग शायद कुछ समय के लिए पैसे बचा लें, लेकिन वे अपनी प्रतिष्ठा, विश्वास और सम्मान खो देते हैं और एक बार खोया हुआ विश्वास, फिर आसानी से वापस नहीं मिलता…!

“उधार की रकम से ज्यादा कीमती, इंसान का चरित्र और विश्वास होता है…!”

सुरेश कुमार व्यास “जानम”
सिखवाल समाचार®️
सत्य का “दर्पण” समाज को “अर्पण”

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