आज किसी भी समाज में फर्जी सिम कार्ड का उपयोग केवल धोखाधड़ी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे सोशल मीडिया पर गाली-गलौज, अफवाहें, चरित्र हनन और लोगों को बदनाम करने जैसी ओछी हरकतें बढ़ती जा रही हैं, जिसमें कुछ दोगले किस्म के लोग शिखण्डी की पूरी भूमिका निभाते हैं, छिपी हुई पहचान वालों के साथ उनके पीछे बैठकर कुछ फर्जी पदाधिकारी समाज की शांति और सम्मान को नुकसान पहुँचा रहे हैं…!
ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि सामाजिक नैतिकता पर भी हमला हैं, तकनीक का उपयोग समाज सुधार के लिए होना चाहिए, समाज को तोड़ने के लिए नहीं…!
व्यंगात्मक सुविचार:
“चेहरा छुपाकर वार करने वाले, अक्सर सच्चाई से सबसे ज्यादा डरते हैं, समाज के प्रतिष्ठित लोगों पर समाज में कुकुरमुते की तरह उगे हुए कुछ अनैतिक कार्यों में सहयोग करने वाले ऐसे फर्जी पदाधिकारियों को प्रोत्साहित कर लोगों पर झूठे आरोप मढ़ना, कीचड़ उछालना जैसे कृत्य करते हैं…!
“फर्जी सिम से बनाई गई घटिया पहचान, इंसान की असली सोच बता देती है…!”
“सोशल मीडिया की गंदगी, समाज की मानसिकता का आईना बनती जा रही है, नाम छुपाने से कर्म नहीं छुपते, कीबोर्ड का शेर, असल जिंदगी में अक्सर कायर होता है…!”
“फर्जी आईडी और फर्जी सिम से फैलाई जाने वाली नफरत वर्तमान में समाज के लिए सबसे बड़ी बीमारी है…!”
👉 सुरेश कुमार व्यास “जानम”✍️
👉 सिखवाल समचार ®️
👉 सत्य का दर्पण 🪞 समाज को अर्पण…!






